सुरेश चन्द्र अवस्थी – डेंगू से बचाव के लिए जयशंकर प्रसाद वार्ड में किया गया एंटी लार्वा का छिड़काव

मौसम में परिवर्तन आने के साथ ही शहर से लेकर देहात तक मच्छरों का आतंक फैल जाता है और साथ ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों में भी वृद्धि हो जाती है. मच्छरों से निपटने के लिए लखनऊ जिले में शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक एंटी लार्वा के छिड़काव का सिलसिला शुरू हो गया है. साथ ही विभिन्न स्थानों पर लोगों को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि बीमारियों से बचने के लिए जागरूक भी किया जा रहा. एंटी लार्वा के छिड़काव के लिए नगर निगम द्वारा टीमों का गठन कर दिया गया है, जो अलग अलग वार्डों में जाकर दवाई का छिडकाव कर रहे हैं.

इसी कड़ी में लखनऊ के जयशंकर प्रसाद वार्ड में पार्षद श्रीमती गीता सुरेश चन्द्र अवस्थी ने वार्डवासियों को डेंगू आदि के खतरे से बचाने के लिए वार्ड में एंटी-लार्वा का छिडकाव करवाया. खुली पड़ी नालियों, कूलर इत्यादि में अच्छे से एंटी-लार्वा का छिडकाव करवाने के साथ साथ उन्होंने स्थानीय निवासियों को मच्छरों से बचने के लिए जागरूक भी किया और यह सारा कार्य अपने नीरिक्षण में संपन्न कराया.

गौरतलब है कि डेंगू और मलेरिया रोग को फैलाने वाला मच्छर शहरी और अर्ध शहरी आबादी वाले इलाकों में ज्यादा पाए जाते हैं. मादा मच्छर घरों या कहीं भी जमा साफ पानी में अंडे देती हैं और घरों के अंदर रखे खुले पानी, कूलर, छत पर रखी पानी की टंकियों, टीन के खाली डिब्बे, पुराने टायर, खाली बोतलों, मनी प्लांट के गमलों आदि में मच्छरों का बसेरा अधिक होता है. इन स्थानों पर प्रजनन कर ये मच्छर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और ग्रसित व्यक्ति को काटकर स्वस्थ व्यक्ति के खून में लार्वा संक्रमित कर देते हैं, जिसका नतीजा डेंगू, मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के तौर पर सामना आता है.

इस अवसर पर पार्षद गीता सुरेश चन्द्र अवस्थी ने बताया कि बीमारी फैलाने वाले ये मच्छर ज्यादातर कूलर और एसी में छिपे होते हैं, इसलिए इन्हें चलाने या इनका इस्तेमाल बंद करने से पूर्व इन्हें पूरी तरह साफ कर लेना चाहिए. साथ ही कूलर की पुरानी जाली भी बदल देनी चाहिए, क्योंकि दो साल बाद भी पानी के संपर्क में आने से लार्वा फिर सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है.

डेंगू से बचाव के निम्नलिखित उपाय अपनाएं क्योंकि सावधानी बेहद जरूरी है:


1. डेंगू का मच्छर ठहरे हुए पानी में पनता है, इसलिए घरों में और आसपास के इलाकों में पानी न जमा होने दें.

2. घरों में कूलर में भरा पानी भी हर 2 से 3 दिन बाद जरूर बदलें.

3. घर के आसपास नालियों, गड्ढों, तालाबों अथवा कहीं भी रुके पानी में नगर निगम से एंटी लार्वा का छिड़काव जरूर करवाएं.



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